
जय जिनेन्द्र बंधुओ,यहाँ परम पूज्य जैन मुनिओ के द्वारा दिए गए प्रवचों का संग्रह समाहित है । आशा करते है की यह आपके धर्म के मार्ग़ पर चलने में सहायक बने। । । । मुनि श्री क्षमासागर जी द्वारा रचित कविता ।अभी मुझे और धीमे कदम रखना है,अभी तो चलने की आवाज़ आती है.जहाँ तरलता थी, में डूबता चला गया ,जहाँ सरलता थी, में झुकता चला गया ,संवेदनाओं ने मुझे जहाँ से छुआ,में वहीं से पिघलता चला गया ।।।।।🙏🏼 *गुरु चरणों में बारम्बार नमोस्तु,*🙏🏼