
ऐ जिंदगी तेरा क्या कहना, लाखों तेरे रंग हैंमोर जैसे झूमती या पर्वत जैसी तू चुप हैमां जैसी शीतल है या पिता के जैसी धूप हैखुशियों सी रंगीली और दर्द सी बदरंग हैउचित अनुचित से परे, आनन्द तेरा रंग हैआंसू है, मुस्कान है, उम्मीद है, भगवान हैकेसरिया है, सफेद है और हरा भी तेरा अंग हैतू धर्म है, इमान है, हर शख्स का तू रंग हैपवित्र सी किसी उपवन में ईश्वरीय सारंग हैकहीं है श्वेत और कहीं श्याम तेरा रंग हैजंग की बिसात क्या? आप ही तू जंग हैकभी वैभवशाली, कभी विध्वंसकारी सब तेरा ही रंग हैहो हवा का रूख जिधर भी तेरा अपना ही तरंग है!!